इलाहाबाद स्थित केन्द्रीय रेल विद्युतीकरण संगठन (कोर) के नाम से सामान्यतः जाना जाने वाला एक अलग प्रशासनिक संगठन संपूर्ण भारत की रेल विद्युतीकरण परियोजनाओं की समग्र निगरानी रखता है।
यह संगठन महाप्रबंधक के अधीन है।
वर्तमान में इसकी विभिन्न परियोजनाएं के दौरान भिन्न-भिन्न स्थानों से परिभाषित हो रही हैः- अंबाला, भुवनेश्वर, चेन्नै, गोरखपुर हाजीपुरा, कोटा, लख्ननऊ, न्यूजलपाईगुड़ी और सिकन्दराबाद। यह संगठन सन 1961 से कार्यरत है।
आम तौर पर कोर के नाम से इतिहास में जाना जाने वाला केन्द्रीय संगठन रेल विद्युतीकरण (केन्द्रीय रेल विद्युतीकरण संगठन) इलाहाबाद में 1979 में स्थापित किया गया।
लगभग 171 अधिकारी एवं 1824 ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारी कोर एवं परियोजना कार्यालयों में रेल विद्युतीकरण का कार्य कर रहे हैं। बंबई वी टी एवं कुर्ला हारबर के बीच 3फरवरी, 1925 को 16 कि. मि.के एक छोटे सेक्शन में 1500 वोल्ट डाइरेक्ट विद्युत कर्षण के साथ यह प्रारंभ हुआ।
दिनांक 31.3.2008 तक विद्युत कर्षण प्रणाली के अधीन भारतीय रेल के पास 18145 रूट कि.मि. है । इसमें मुख्य मार्ग हावड़ा-दिल्ली, हावड़ा-बंबई, दिल्ली-बंबई, दिल्ली-चेन्नै, चेन्नै- बंगलुरू, हावड़ा- चेन्नै, एर्नाकुलम-त्रिवेन्द्रम और दिल्ली- अमृतसर शामिल हैं। हावड़ा से दिल्ली तक प्रथम ट्कं मार्ग का विद्युतीकरण 05.8.1976 को पूरा किया गया।
पहली फरवरी 1988 को जब बंबई से दिल्ली के पूरे मार्ग अर्थात् जो कि पश्चिम रेलवे होकर भारत की वाणिज्यिक राजधानी और राजधानी के बीच विद्युत कर्षण पर गाड़ी संचालन कर रेवि द्वारा पुनः इतिहास रचा गया । हावड़ा से दिल्ली के प्रथम मुख्य ट्कं मार्ग के बाद पूर्ण विद्युतीकृत होने वाला यह दूसरा ट्कं मार्ग था। भारतीय रेलों पर यह लगभग 60/. माल यातायात एवं लगभग 47/. सवारी यातायात की ढुलाई विद्युत कर्षण द्वारा की जाती है।
10वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान रेल विद्युतीकरण ने 1800 रूट कि. मि. के निर्धारित लक्ष्य को पार कर 1810 रूट कि. मि. का ऊर्जाकरण किया । 11वीं पंचवर्षीय योजना (2007.12 के लिए 1000 आर के एम का लक्ष रखा गया है ।